पुणे आईएमए और पुणे के विभिन्न अस्पतालों ने सह्याद्री अस्पताल पर हुए हमले की कड़े शब्दों में निंदा की।

पुणे स्थित सह्याद्री सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, हड़पसर में एक मरीज की दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु के बाद हुए हमले और तोड़फोड़ की इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) और एसोसिएशन ऑफ हॉस्पिटल्स इन पुणे ने कड़े शब्दों में निंदा की है।

आईएमए पुणे इकाई के अध्यक्ष डॉ. सुनील इंगले ने कहा कि हर चिकित्सा संस्थान मरीज के इलाज के दौरान सभी आवश्यक सावधानियां और उचित चिकित्सीय प्रक्रियाएं अपनाता है। इलाज की शुरुआत में और उसके दौरान मरीज व उनके परिजनों को उनकी समझ के अनुसार पूरी जानकारी दी जाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गंभीर और आईसीयू में भर्ती मरीजों की स्थिति किसी भी समय बिगड़ सकती है और सभी डॉक्टर मरीज के शीघ्र और पूर्ण स्वस्थ होने के लिए ईमानदारी से प्रयास करते हैं।
उन्होंने कहा कि यदि किसी को अस्पताल या डॉक्टरों के खिलाफ कोई शिकायत या असंतोष हो, तो उसके लिए कानूनी और वैधानिक मंच उपलब्ध हैं, न कि हिंसा।

हॉस्पिटल बोर्ड ऑफ इंडिया, पुणे चैप्टर के चेयरमैन डॉ. संजय पाटिल ने कहा कि ऐसे मामलों में कानून को हाथ में लेना और अस्पतालों व स्वास्थ्यकर्मियों पर हमला करना किसी भी तरह से उचित नहीं है। उन्होंने इसे अत्यंत निंदनीय कृत्य बताते हुए कहा कि इससे अस्पताल कर्मचारियों और अन्य मरीजों में भय का माहौल बनता है, जिसका सीधा असर मरीजों के इलाज पर पड़ता है। हमले के बाद सह्याद्री अस्पताल के कुछ मरीजों द्वारा चिकित्सा सलाह के विरुद्ध डिस्चार्ज लेना भी चिंता का विषय है।

आईएमए ने एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में जीवनरक्षक सीपीआर (CPR) प्रक्रिया को गलत तरीके से पेश किए जाने की कड़ी आलोचना की। संगठन ने कहा कि सीपीआर ने अब तक हजारों जिंदगियां बचाई हैं और इस तरह की भ्रामक व गलत जानकारी समाज के लिए घातक साबित हो सकती है, क्योंकि इससे भविष्य में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को सीपीआर देने से हिचक हो सकती है।

आईएमए के सदस्यों ने कहा कि इस तरह की घटनाएं बार-बार सामने आ रही हैं। अधिकांश मामलों में पुलिस सहायता घटना हो जाने के बाद ही पहुंचती है। कई बार अधूरी या गलत जानकारी के आधार पर कुछ राजनीतिक दलों से जुड़े कार्यकर्ता कानून को अपने हाथ में ले लेते हैं, जिससे स्थिति और बिगड़ जाती है।
उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं से डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों का मानसिक मनोबल टूटता है, जिसका सीधा और गंभीर असर अन्य मरीजों के इलाज पर भी पड़ता है। इस विशेष मामले में प्रारंभिक जानकारी के आधार पर आईएमए का मानना है कि डॉक्टरों, अस्पताल या स्टाफ की ओर से किसी भी प्रकार की लापरवाही या चूक नहीं हुई है

आईएमए ने मांग की कि संबंधित असामाजिक तत्वों के खिलाफ महाराष्ट्र मेडिकेयर अधिनियम 2010 के तहत बिना किसी राजनीतिक दबाव के सख्त और त्वरित कार्रवाई की जाए।
हॉस्पिटल बोर्ड ऑफ इंडिया, पुणे चैप्टर के चेयरमैन डॉ. संजय पाटिल ने कहा,
“हम महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस से अपील करते हैं कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अस्पताल परिसरों को ‘सेफ ज़ोन’ घोषित किया जाए।”

एसोसिएशन ऑफ हॉस्पिटल्स इन पुणे ने यह भी निर्णय लिया है कि इस गंभीर मुद्दे को लेकर पुणे के पालक मंत्री अजीत पवार से मुलाकात की जाएगी। संगठन के सदस्यों ने कहा कि पुणे में अस्पतालों और मेडिकल समुदाय पर हमलों की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस सुरक्षा व्यवस्था नजर नहीं आती

इस बीच, रूबी हॉल क्लिनिक की कानूनी सलाहकार मंजुषा कुलकर्णी ने एक आधिकारिक बयान में बताया कि इस घटना के बाद एसोसिएशन ऑफ हॉस्पिटल्स इन पुणे ने आपातकालीन बैठक बुलाई है।
उन्होंने कहा,
“इस घटना के दौरान मृतक मरीज के परिजनों और कथित ‘सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ताओं’ ने न केवल अस्पताल की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया, बल्कि इलाज में शामिल डॉक्टरों और नर्सों के साथ गाली-गलौज और दुर्व्यवहार भी किया।”

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